पापा मम्मी की दूसरी सुहागरात -2

(Papa Mammi Ki Dusri Suhagraat-2)

विशेष 4084 2015-09-18 Comments

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सुबह हुई तो मैंने ध्यान दिया कि पापा मम्मी से बात नहीं कर रहे थे, उनकी बोल चाल बंद थी। मम्मी कुछ बोलती भी तो केवल हाँ या नहीं में उत्तर देते बस!
मुझे मम्मी पापा की उस रात की बात याद थी कि वो दोनों इस बार अकेले और सुहागरात वाली रात की तरह सेक्स करना चाहते हैं।
मैं पापा मम्मी को उनकी दूसरी सुहागरात मनाने और उन लोगो को उसका पूरा आनंन्द लेने का मौका देना चाहता था और उन्हें सुहागरात मनाते देखना चाहता था।
पर अब सुहागरात तो क्या, रोज़ की चुदाई के आसार नहीं दिख रहे थे, पापा मम्मी से बेहद नाराज़ थे।

मैंने पापा मम्मी का प्रेमालाप करने के लिए एक तरकीब सोच ली जिससे मैं मम्मी पापा को उनकी सुहागरात मानते देख लेता और उन्हें मुझ पर शक भी नहीं होता।

पापा नहाने के बाद बैडरूम में जाकर शॉप पर जाने की तैयारी करने लगे, मम्मी पापा की नाराजगी को समझ रही थी इसलिये वो पापा को मनाने में लगी हुई थी।

सुबह नाश्ते की टेबल पर जब मैं, मम्मी और पापा नाश्ता कर रहे थे तब मैंने उनसे कहा- पापा मेरे एग्जाम होने वाले हैं और आप लोग रात मे टीवी ऑन कर देते हो, कुछ पढ़ाई नहीं हो पाती। अब मुझे एग्जाम की तैयारी करनी है इसलिए मैं आज से बगल वाले कमरे में पढाई करूँगा और वही सोऊँगा।
पापा बोले- तुम्हें जो करना हो करो, मैंने क्या रोका है तुम्हे पढ़ाई करने से !

मम्मी पापा को वहीं पर मेरे सामने ही मना रही थी, वो पापा से कह रही थी- अब जाने भी दो न! सॉरी बाबा!
पापा कोई जवाब नहीं दे रहे थे, फिर वो चुपचाप दुकान चले गए।

पापा ने मुझे बगल वाले कमरे में शिफ्ट होने की इज़ाज़त दे दी। मैंने भी अपना बोरिया बिस्तर बाँधा और एग्जाम तक के लिए अपने बेडरूम से बिल्कुल सटे दूसरे कमरे में आ गया।
इस कमरे में एक बेड था, एक कुर्सी और एक मेज थी, बेड जिस दीवार से सटकर लगा था उस दीवार पर ही एक लकड़ी की खिड़की थी जो हमारे बैडरूम की ओर ही खुलती थी पर मैं उसे कहाँ खोल सकता था।

जब मम्मी शाम 3:50 के आस पास सब्ज़ी लेने मॉर्केट गई तभी मैंने जल्दी से पेंचकस लाकर खिड़की में छोटा सा छेद कर दिया। अब मैं कभी भी बेड पर लेटे हुए भी मम्मी पापा की चुदाई देख सकता था। मैंने अपना सारी बुक्स वगैरह दूसरे कमरे में शिफ्ट कर ली। मेरी तैयारी पूरी हो चुकी थी, अब मैं पापा मम्मी को चुदाई करते कभी भी देख सकता था।

आज मैं बहुत रोमांचित था।
करीब 7:30 बजे पापा घर में आये और अपने बेड रूम में कपड़े बदलने चले गए।
मम्मी जो बाथरूम में नहा रही थी, नहा कर बेड रूम में चली गई। मेरा दिल कह रहा था कि कुछ मज़ेदार देखने को मिल सकता है अब!

पापा को बेड रूम में देख कर मम्मी ने उन्हें छेड़ने के उददेश्य से अपना पेटीकोट नीचे गिरा दिया उनके मोटे मोटे नितम्ब साफ़ देखे जा सकते थे और फिर झट से ऊपर ऊपर उठाया। मानो मम्मी यह दिखाना चाह रही हो कि पेटीकोट उनसे अनजाने में नीचे गिर गया हो।

पापा भी चुदाई के माहिर खिलाड़ी हैं, उन्होंने तपाक से मम्मी से कहा- अब ये सब करने से कुछ नहीं होगा! अब जब कहोगी तब ही करूँगा और वो भी कंडोम के साथ! तुम्हारी दुत्कार ललकार कौन सुनेगा रोज रोज!

मम्मी मुस्कुराते हुए बेड की तरफ आई और पापा के बगल में आकर बैठ गई और पापा के चेहरे पर एक चुम्बन कर दिया और कहा- ऐ जी, तुम कुछ समझते नहीं हो, बस नाराज़ हो जाते हो, मेरी मज़बूरी भी समझा करो।

पापा का गुस्सा सुबह के मुकाबले काफी कम था पर वह इसे मम्मी को शो नहीं करना चाहते थे। पापा अब भी कुछ नहीं बोले और टीवी ऑन कर देखने लगे।
मैं ये सब खिड़की में बने छेद से देख रहा था।

मम्मी भी अब साड़ी पहन कर बाहर आ गई और किचन में जाकर रात के खाने की तैयारी शुरू कर दी।

लगभग 8:30 बजे मम्मी ने खाना बना लिया और कुछ देर बाद हम सब डाइनिंग टेबल पर खाना खाने लगे। पापा अब भी मम्मी से ज्यादा कुछ बोल नहीं रहे थे।
शायद पापा को मनाने के लिए ही मम्मी ने कहा- अंकित, खाना खत्म कर आइसक्रीम लाओ! आज बहुत मन कर रहा है।
मैंने कहा- पैसे कहाँ से लूँ?
मम्मी बोली- पापा की जेब से ले लो!

तभी पापा झट से बोले- अंकित की मम्मी, तुम ही निकाल के दे दो।
मम्मी पापा के वॉलेट से पैसे निकालने लगी, तभी कोई चीज जमीन में गिरी, मैंने देखा कि वो मैनफोर्स कंडोम का पैकेट था जिसे मम्मी ने झट से उठाकर अपने ब्लाउज में रख लिया और फिर मुझे पैसे देने के बाद वो बैडरूम की तरफ चली गई, शायद वो उस कंडोम के पैकेट को रखने के लिए गई थी।
तब मैं समझा की पापा ने मम्मी को पैसे निकलने को क्यों कहा।

मैं बाजार गया और आइसक्रीम लेकर आया और फिर हम सबने उसे मज़े से खाया।
आइसक्रीम खाकर में अपने नए कमरे, जहाँ मैं एग्जाम तक के लिए शिफ्ट हुआ था, में आ गया और उनकी चुदाई शुरू होने का इंतज़ार करने लगा।

क्योंकि मैंने मम्मी को कंडोम छुपाते देख लिया था इसलिए मुझे ये भरोसा हो गया था कि आज मेरे काम का कुछ हो सकता है।
मैंने कुछ देर पढ़ाई की, पर पढ़ाई मे मेरा मन कहा लगने वाला था, मैं बीच बीच खिड़की में बने छेद से यह भी चेक कर लेता कि मम्मी बैडरूम में आई या नहीं।

करीब 10:30 बजे मम्मी सब काम निबटा कर कमरे में आई और बेड पर आकर बैठ गई। मैंने भी अपनी किताबें बंद कर दी और उस छेद से अपने पुराने बैडरूम की तरफ टकटकी बांध कर देखने लगा।
मम्मी फिर उठी और मेरे कमरे की तरफ आई मेरा कमरा अंदर से लॉक था। मेरे कमरे के बाहर आकर मम्मी बोली- अंकित, पढ़ रहे हो क्या?
मैं कुछ नहीं बोला।
मम्मी फिर बोली- अंकित!
और फिर वो अपनी कमरे की तरफ चली गई।
शायद मम्मी यह देखना चाहती थी कि मैं जग रहा हूँ या सो गया, क्योंकि मैंने अपने कमरे की लाइट उनके आने से पहले बुझा दी थी इसलिए उन्हें मुझ पर तनिक भी शक नहीं हुआ।

पापा करवट लेकर लेते हुए थे, वो आज कोई पहल नहीं करना चाहते थे।
मैंने देखा कि मम्मी भी कमरे में आ गईं और रोज़ की तरह उन्होंने अपनी साड़ी निकाल दी, वो अब केवल पेटीकोट और ब्लाउज में थी। इसी तरह वो पापा के बगल में आकर लेट गई और टीवी ऑन करके देखने लगी।

करीब 20 मिनट बाद पापा की तरफ से कोई पहल न होता देख मम्मी ने टीवी बंद कर दी और पाप के बगल में लेट गईं और करवट लेकर उनके ऊपर आ गई और पापा के चेहरे पर दो तीन चुम्मे जड़ दिए।
पापा बोले- हटो ऊपर से ! मुझे नहीं करना है।
पापा के चेहरे से ही पता चल रहा था कि उनका गुस्सा बनावटी है और वो केवल मम्मी को ताने मार रहे थे।

जिस पर मम्मी मुस्कुरा कर बोली- अच्छा जी! रोज़ तुम कहते हो तो मैं करती हूँ, आज मैं कह रही हूँ तो तुम नखरे दिखा रहे हो।
पापा बोले- हाँ! तुम तो रोज़ झट से तैयार हो जाती हो, रोज़ नखरे करती हो ! कभी कहती हो ये मत करो, कभी कहती हो वो मत करो।
मम्मी बोली- अब गुस्सा थूक भी दो, तुम्हें सुबह से मना रही हूँ पर तुम आज बहुत परेशान कर रहे हो।

मम्मी बोली- अब मनाओ न अपनी दूसरी सुहागरात! अभी उस दिन तो बहुत चहक रहे थे, अब क्या हुआ?
पापा बोले- कहाँ मनाने देती हो तुम! कभी कहती हो अब एक हफ्ते छूने नहीं दूँगी। कभी कुछ, कभी कुछ! अभी कल इतना अच्छा मूड बना था पर तुमने करने नहीं दिया।
मम्मी पापा को उकसाते हुए बोली- बस डर गए!

पापा झट से बोले- हाँ जैसे तुम डरी थी अपनी सुहागरात में ! पूरा शरीर काँप रहा था तुम्हारा, जैसे ही मैंने तुम्हें पहला किस किया था चुदाई के वक़्त की बात ही जाने दो।
मम्मी बोली- हाँ तुम तो ऐसे बोल रहे हो जैसे बड़े भीम बने बैठे थे। पूरे एक घंटे बाद हाथ पकड़ा था वो भी डर डर के !
मम्मी बोली- अब करो न!

पापा बोले- तुमने कहा था कि अब की बार जब भी करेंगे तो जो कहोगे वो करूँगी।
मम्मी बोली- हाँ बाबा ! जो करना हो कर लो, अभी भी कह रही हूँ, बस गन्दी संदी चीजें न कहना!
पापा बोले- सम्भोग में कुछ भी गन्दा नहीं होता!
मम्मी बोली- अब करो भी!
मम्मी पापा की बात सुनकर ऐसा लग रहा था जैसे मैं किसी दूसरी दुनिया में पहुँच गया हूँ।

सच्ची घटना पर आधारित कहानी जारी रहेगी…
मेरी कहानी आपको कैसी लगी, मुझे जरूर बताएँ, मुझे ढेर सारे मेल करें।
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