जोधपुर की कुंवारी लड़की-2

(Jodhpur Ki Kunvari Ladki- Part 2)

This story is part of a series:

आपने अब तक मेरी कहानी के पिछले भाग में पढ़ा कि कैसे अन्तर्वासना से मुझे मेरी ही
स्कूल की एक लड़की मिली, जो कार में मेरा लंड चूस रही थी

यह मेरी अच्छी किस्मत ही थी कि मुझे अन्तर्वासना के माध्यम से एक ऐसी लड़की मिली जो बिलकुल अनछुई हो, किसी छुईमुई की तरह छू लेने भर से आपने मन के कपाट बंद कर लेने वाली लड़की।
पर एक बात बताओ दोस्तो, जो लड़की जितनी शर्मीली होती है, जिनका खुलना बहुत मुश्किल होता है, वो एक कुबेर के खजाने जैसे होती है, खुलती बड़ी किस्मत और मेहनत से है, पर एक बार खुल गयी तो अच्छी अच्छी रंडियाँ भी उसके आगे पानी भरती हैं.

खैर हम अपनी कहानी पे आते हैं.

जैसा कि मैंने बताया कि मेरी किस्मत बहुत अच्छी थी जो मुझे अर्पिता मिली; ऊपर से स्कूल की फ्रेंड…
पर दोस्तो किस्मत बदलते देर नहीं लगती।
मेरा मन तो था कि उसे फार्म हाउस पे ले जाऊं और जम कर चोदूँ, पर अचानक पापा का फ़ोन आ गया, मेरे मौसाजी का स्वर्गवास हो गया था तो मुझे जल्दी से उससे शहर में छोड़ के घर जाना पड़ा।
हाँ… जाते जाते उसको किस जरूर कर पाया।

वैसे तो स्वर्गवास के बारे में बताने की जरूरत तो नहीं थी। पर सच्ची कहानी में कुछ तो ऐसा हो ही जाता है, बनाई हुई कहानी होती तो शायद खुदा में भी मैं होता और बंदगी भी मेरी होती।

खैर मुझे जयपुर से वापस आते आते वापस सात दिन लग गए, इन दिनों में मन में अर्पिता का ख्याल तो आया, पर न उसका कॉल आया न मैंने किया।

जैसे तैसे अपने आप को संभाला और वापस जोधपुर आ गया, आते ही अर्पिता को कॉल लगाया, पर कॉल लगा नहीं।
मैंने भी वापस नहीं किया, सोचा कि कहीं बिजी होगी।

रात को दो बजे के आस पास वीडियो कॉल आया अर्पिता का, कॉल पर बात करते करते धीरे धीरे सेक्सी बातें होने लगी। क्या बात हुई वो फिर कभी बताऊंगा क्योंकि चार घंटे से वीडियो कॉल में क्या क्या हुआ… ये बताने की लिए भी कहानी का एक भाग लग जायेगा।

हम दोनों वीडियो कॉल पे किस, हग आदि करते अगले दिन मिलने का वादा करते हुए सो गए।

फार्म हाउस में मस्ती

अगले दिन मैंने सबसे पहले अपने फार्म हाउस वाले नौकर को फ़ोन किया और सारा प्लान सेट कर लिया. वो मेरे सारे राज़ जानता था कि मैंने किस किस लड़की को चोदा है, उनमें से कौन रंडी थी कौन गर्लफ्रेंड, मैं कौन से ब्रांड की दारू पीता हूँ, मेरे दोस्त कौन सी सी पीते हैं वगैरा वगैरा… इसीलिए पापा जो पगार उसे देते थे, उससे दुगुना मैं उसे मुंह बंद रखने के लिए देता था।

खैर अगले दिन मैं अर्पिता से मिलने पंहुचा, उसे कार में बैठाया और हम निकल पड़े आपनी मंजिल की ओर!
मंजिल थी मेरे फार्म हाउस का स्विमिंग पूल… हालाँकि वो स्विमिंग पूल नहीं बल्कि ट्यूब वेल था जिसका टैंक हमने एक छोटे पूल जैसा बनवा लिया था।

वैसे तो हम कार में भी मस्ती कर रहे थे, एक दूसरे को किस करना, लंड, चूत, होंठों और हाथों का खेल जारी था.
इसी तरह हम फार्महाउस पहुंच गए लगभग दो घटे की ड्राइव के बाद क्योंकि मैं बहुत धीमी गति से गाड़ी चला रहा था।

सोफे पे मैं और अर्पिता बैठे थे, एक दूसरे के साथ चिपक के एक ही कम्बल में… चूंकि हम दोनों आज पूरा दिन फ्री थे, घर पे शाम को आने का बोल कर आये थे। और जैसा कि मैंने बताया कि मुझे लड़की को धीरे धीरे गरम करना और फिर चोदना अच्छा लगता है। मैं कौन सा घंटे के हिसाब से रंडी लाया था जो जल्दबाजी करूँ! अभी तो सुबह के 11 बजे थे, पूरा दिन था हमारे पास… वैसे भी जब आपके पास एक कुंवारी चूत हो तो आपको समय लेना चाहिए, इससे ना केवल आपको मजा आएगा, बल्कि लड़की भी जिंदगी भर याद रखेगी और दोनों को ही इस अन्तर्वासना से भीगे हुए पलों का भरपूर आनंद उठाएंगे।

खैर हम दोनों ने फुल एसी चलाया और एक दूसरे की बांहों में समा गए, साथ ही साथ वहीं ड्राइंग हॉल में ही हम मूवी देखने लग गए। नहीं नहीं… जैसा बाकी कहानियों में होता है कोई एडल्ट पोर्न मूवी नहीं, बल्कि एक रोमांटिक मूवी।

मैं और अर्पिता धीरे धीरे एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे, अभी तक हमने एक भी कपड़ा नहीं निकाला था, बस ए सी की ठंडक के कारण कम्बल में थे।

जैसे जैसे वक़्त बीत रहा था, वैसे वैसे हमारी गाड़ी मंजिल की और बढ़ रही थी, मैंने अर्पिता का हाथ पकड़ा और धीरे धीरे चूमने लगा और गले लगाने लगा। हम दोनों एक दूसरे के आगोश में खो रहे थे, न जाने कितनी देर तक हम वैसे ही एक दूसरे की बांहों में रहे, शायद 5-7 मिनट तो कम से कम, फिर मैंने धीरे धीरे उसी पोजीशन पर हंस के गर्दन पर किस किया।
अर्पिता सिर्फ कसमसा कर रह गयी।

दोस्तो, यहाँ पर बता दूँ कि बहुत लोग सीधे होंठों पर किस करते हैं… पर मैं नहीं, किस करने को दोनों के अधर न तड़पें तो मजा कैसा?

हर किस के साथ अर्पिता की एक मीठी से आह… निकल रही थी, जो माहौल को और मादक बनाने को काफी थी.

अर्पिता की गर्दन से होता हुआ मैं उसके कानों पर किस करने लगा, वैसे भी कानों के पास का हिस्सा बहुत संवेदनशील होता है, गर्दन से गाल, ठुड्डी और चेहरे पर किस करने लगा.
अब अर्पिता तो जल बिन मछली की भान्ति तड़प रही थी, उसकी साँसें तेज़ होने लगी और उसके साथ साथ उसके सीने पर तैनात दूध के तो बड़े बड़े गुब्बारे गुब्बारे भी हिल रहे थे.

चूंकि मैं उसके चेहरे के बहुत पास था तो हर उतार चढ़ाव बहुत गहराई तक देख सकता था। मैंने अपनी हालत को काबू किया और चेहरे पर किस करना जारी रखा, होंठों के चारों तरफ किस किया, पर होंठों को अभी तक नहीं हुआ।
पर अचानक बाज़ी पलट गयी, अभी तक तड़प रही अर्पिता ने अचानक मेरे बालों से पकड़ कर मेरा चेहरा दूर किया, कुछ सेकंड्स क लिए तो जैसे समय ठहर सा गया, हम दोनों की साँसें तेज़ हो रही थी और एक दूसरे को हवस भरी निगाह से देख कर हम दोनों एक दूसरे में समा जाने को बेक़रार थे।

फिर अचानक जैसे नागिन डसती है, वैसे ही बिजली की फुर्ती से वो मुझे किस करने लगी, अभी भी मेरे बाल कस के पकड़े हुए थे, जैसे मैं कहीं भागा जा रहा हूँ। अब अर्पिता मुझ पर हावी होने लगी, लगभग दस मिनट तक एक हाथ से मेरे बालों को पकड़ कर मुझे किस करती रही थी। उसका दूसरा हाथ कभी उसकी चूत तो कभी मेरे लंड को कपड़ों के ऊपर से सहला रहा था।

हम दोनों बेहताशा एक दूसरे को चूम रहे थे, हमारी जीभ आपस में दंगल कर रही थी। कभी मैं उसे होंठों को दांतों से काट लेता, कभी वो मेरे होंठों को चबा जाने ही हद तक काट लेती।
बिल्कुल जैसे फिल्म ‘शूटआउट एट वडाला’ में जॉन अब्राहम कंगना राणावत के होंठ काटता है।

हम दोनों भी अब कामवासना के चरम पर थे, मैंने उसके बाल पकड़े, चेहरा पीछे किया और होंठ ठुड्डी से होता हुआ उसे मम्मों की तरफ बढ़ने लगा और उसके टॉप के अन्दर मुंह डालने की कोशिश कर रहा था.
फिर उसके टॉप के ऊपर से ही मैंने उसके मम्मों को चूसना शुरु कर दिया। दोस्तो, जैसे हर चीज़ का अपना मजा होता है, जो मजा दारू में आता है वो दूध में नहीं… और जो मजा दूध में आता है दारु में नहीं।
वैसी ही मम्मों को कपड़ों के ऊपर से चूसने का भी अपना मजा है। और मैं यह आनंद छोड़ना नहीं चाहता था.

मैंने उसके स्तनों को काफी देर तक चूसा और दबाया और अर्पिता भी इसमें मेरा साथ दे रही थी, वो अपनी पूरी ताकत से मेरा मुँह अपने सीने में दबा रही थी। पर अन्तर्वासना की कृपा से मैं कच्चा खिलाड़ी नहीं रहा, मैं धीरे धीरे स्तनों से नीचे आना लगा, थोड़ा सा उसका टॉप ऊपर किया, इतना कि मम्मे न दिखें! और उसके पेट, नाभि पर चूमने लगा, काटने लगा.

दोनों हाथों से मैंने उसकी कमर तो थोड़ा सा उठाया और उस मखमली गोरे दूध जैसे सफ़ेद पेट पर किस करने लगा. अर्पिता की कामुकता तो काबू से बाहर होने लगी, वो अपने ही हाथों से अपने मम्मे मसल रही थी और साथ ही साथ बेहद मादक अंदाज़ में सिसकारियाँ ले रही थी, हर सांस के साथ उसका पेट ऊपर नीचे हो रहा था, जैसे समंदर में तूफ़ान उठ रहा हो।

धीरे धीरे मैं नीचे जाता रहा, उसके बदन से हर हिस्से को किस करते हुए, नीचे अपनी मंजिल की तरफ बढ़ रहा था, चूत के पास आते ही एक मदहोश करने वाली महक ने मेरा स्वागत किया, ये और कुछ नहीं अर्पिता के चूत से निकल रहे अमृत की महक थी.
पर मैं भी कहाँ मानने वाला था, चूत को छोड़ कर साइड से होता हुआ सीधा जांघों पर आ गया जिसकी शायद अर्पिता को उम्मीद न थी कि मैं चूत को नहीं किस करूँगा। अभी तक हमने कोई भी कपड़े नहीं निकले थे।

अर्पिता की जांघों को मैं ऐसे खा चबा रहा था जैसे कि चिकन लेग पीस हो।

तड़पती हुई उस कुंवारी कलि ने मुझे अचानक अपने पाँव में जकड़ लिया जिससे मेरा चेहरा उसकी चूत के पास फंस गया।
ऐसा लग रहा थे जैसे आप तक तड़प रही अर्पिता में अचानक बहुत ताकत आ गयी है। हाथों से मेरे बालों को और पाँव से गर्दन को अपनी इस तरह फंसा लिया कि मैं सांस भी नहीं ले पाऊँ!

उस वक़्त मुझे एहसास हुआ कि इस लड़की में इतनी ताकत है कि मुझ जैसे हट्टे कट्टे आदमी को दबा लिया।

खैर मैं भी आत्मसमर्पण करते हुए बेहताशा उसकी चूत को चूसने लगा, जीन्स की ज़िप भी दांतों से खोलनी पड़ी और फिर ज़िप से ही जीभ अन्दर डाल कर चूत को पेंटी के ऊपर से चूसने लगा। अर्पिता का रवैया आक्रामक हो रहा था अब, ऐसा लग रहा था कि वो ताकत के दम पर मेरे साथ जोर आजमाइश कर रही है।

यहाँ मैं यह भी बताना चाहूँगा कि वो एक मदमस्त जवान जिस्म की मालकिन तो है ही, पर पंजाबी खून होने के कारण अच्छी खासी ताकतवर भी है, कम से कम लड़कियों की हिसाब से तो।

तो वापस आते है कहानी पर… जैसा मैंने बताया अर्पिता आक्रमक हो रही थी, मुझ पर हावी हो रही थी।
दोस्तो… हो सके तो एक बार लड़की को अपने ऊपर हावी होने देना। कसम खुदा की… जन्नत की सैर करवाएगी!

अभी तक मैं अर्पिता के ऊपर था, पर अब वो ऊपर आने लगी, मेरे पेट पर बैठ गयी और मेरे बदन से कपड़े निकलने लगी। हालांकि वो कपड़े निकालना कम, फाड़ना ज्यादा था, मेरे शर्ट के सारे बटन टूट गये, शर्ट खुलते ही मेरी मांसल बॉडी उसके सामने थी, सिक्स पैक एब्स तो नहीं पर दो पैक एब्स जरूर हैं जो उसको मदहोश करने को काफी थे।

वो लगातार मेरे सीने पर, तो कभी होंठों पर चूम रही थी और अब तो गालियाँ भी दे रही थी- साले कुत्ते, कब से तड़पा रहा है, मादरचोद… मेरी चूत में आग लगी हुई है उसे बुझाने की जगह और भड़का रहा है, अब देख मैं तेरा क्या हाल करती हूँ, बताती हूँ तड़पना किसे कहते हैं।

इतना बोल कर वो मेरे चेहरे पर कभी चूमती, कभी मेरे को इतना तेज गले गले लगाती कि जैसे मुझ में समा जाना चाहती हो! मेरी पीठ पर उसके नाख़ून के न जाने कितने निशान बन गए थे, और सीने पर दांतों के… यह तो पक्का था कि अब कुछ दिन, शायद एक महीना मुझे अपने घर वालों से ये निशान छुपाने के लिए ध्यान रखना पड़ेगा।
तो कभी वो मेरे होंठों पर चूमती, काटती, तो कभी मेरा चेहरा अपने स्तनों के बीच में इस कदर फंसा लेती कि सांस लेना भी मुश्किल हो जाये!
और बोलती- ले चूस… चूस जितना चूस सकता है, खा जा इन्हें!

इतना बोल के उसने टॉप के आगे की चैन मेरे मुँह में दी, जिससे मैंने दांतों से पकड़ लिया और वो ऊपर होती चली गयी, टॉप खुलता चला गया।
अब मेरे आगे तो बड़े बड़े दूध के भण्डार थे, एकदम दूध जैसे सफ़ेद, यहाँ एक और किस्मत की बात, अर्पिता ने जो जिस स्टाइल का ब्रा पहना था ,वो बताये बिना कहानी अधूरी है। मुझे नहीं मालूम क्या बोलते है, शायद स्ट्रेप लेस, जिसमे ब्रा सीने से होते हुए सीधा पीठ तक जाती है बिना कंधों के ऊपर से कोई स्ट्रिप लिए।

अब इस तरह की ब्रा में मुम्मे बड़े भी होने चाहियें और ब्रा पहने के बाद वो टाइट भी हो जाते हैं। यह देख कर मुझे फिल्म ‘अशोका’ की करीना कपूर याद आ गयी। मेरी हमेशा से इच्छा थी किसी लड़की को इस तरह की ब्रा में देखने की।
क्या बताऊ दोस्तो… माशाअल्लाह, उस वक़्त अगर अर्पिता मेरी जान… जायदाद भी मांग लेती तो मैं हंसते हंसते दे देता।

अर्पिता और ऊपर होने लगी, उसका पेट अब मेरे सामने था, जिससे मैं बेहताशा चूस और चूम रहा था।
वो और ऊपर हो गयी, अब वो मेरे मुँह के ऊपर लगभग बैठ चुकी थी, एक मदहोश करने वाली महक मेरे नाक तक पहुँची, इस महक को मैं अच्छी तरह जानता था, ये उस कामामृत की है जो चूत से निकल रहा था और अर्पिता की जीन्स गीली हो चुकी थी।

मैं अर्पिता की चूत चाट रहा था, या यों कहें कि वो जबरदस्ती चटवा रही थी और अनापशनाप बोलती जा रही थी- ले चाट मेरी चूत को, जोर से चाट, देख कितना रस निकल रहा है इसमें से आज, मैं उंगली करती हूँ तो इसका आधा भी नहीं निकलता, कुत्ते की तरह चाट, खा जा इसे भी, मादरचोद चूस मेरी चूत को, बहुत तड़पती है ये, आज इसकी सारी तड़प निकल दे। मैं तेरी हूँ, जो करना है कर, बस इस आग को बुझा दे!

कुछ देर में अर्पिता थोड़ी ठंडी हो गयी, मैं समझ गया वो झड़ गयी, और उसकी जींस पर लगा कामरस इसकी गवाही दे रहा था।

अब अर्पिता नीचे आने लगी, शर्ट तो खुल चुका था, अब वो मेरे पेट से होते हुए मेरे लंड तक पहुँच गयी, पहले तो जीन्स के ऊपर से, फिर, जीन्स की ज़िप खोल के लंड निकाल लिया.
अब इतना सब सिर्फ पढ़ने के बाद, जब आप लोगों का लंड खड़ा हो सकता है, तो मैं तो महसूस कर रहा था।

लंड महाशय अपने विकराल रूप में अर्पिता की रसभरी जवानी को एक सलाम देते हुए तन के खड़े हो गए। हालांकि अर्पिता ने पहले भी मेरा लंड कार में अपने मुख में लिया था, पर आज बात कुछ और थी, वो आराम लंड से खेलने लगी, नीचे से लेकर ऊपर तक जीभ से लंड को चाट रही थी।
पर अचानक वो रुक गयी.
आप सोच रहे होंगे कि मेरी कहानी में बहुत अचानक आ रहे हैं, पर सेक्स का मजा तभी है जब उसका पूरा लुत्फ़ उठाया जाये.

अर्पिता ने अपना बैग निकला, और लिपस्टिक लगाने लग गयी, पहले जो लगायी थी वो तो मैं खा चुका था और बाकी मेरे शरीर पर निशानों में मौजूद थी।

लिपस्टिक लगाने के बाद वो फिर लंड चूसने, चाटने लगी। उसकी यह अदा किसी को भी फ़िदा करने को काफी थी। गोरा गोरा चेहरा, उस पर काले काले बाल, जिसमें से कुछ लटों को भूरा रंग हुआ था, काजल जैसे काली काली पलकें, उस पर हल्की कजरारी आँखें, होंठों पर सुर्ख लाल लिपस्टिक, और एकदम सफ़ेद दांत… लाल जीभ और उन सबके बीच एक सम्राट की तरह तन के खड़ा मेरा 7 इंच लम्बा और 3 इंच मोटा लंड काला लंड।
इस नजारे को मैं कभी नहीं भूल सकता।

मेरा लंड जो थोड़ी देर पहले काला था, अब चूसने से और लिपस्टिक के कारण लाल हो गया।
अर्पिता का जो मन कर रहा था, वो मेरे लंड के साथ कर रही थी, कभी चूमती, कभी हाथों से मसलती, कभी लंड का सिर्फ सुपारा चूसती तो कभी पूरा मुँह में ले लेती, गले तक, तो कभी प्यार से थप्पड़ मारती, कभी नीचे से ऊपर तक जीभ से चाटती, कभी नीचे गिराने की असफल कोशिश करती, जितना नीचे गिराने की कोशिश करती, उतना ही उचक कर लंड महाराज खड़े हो जाते।

ये सब करते हुए हमें दो घंटे हो गए थे, आखिर बेचारा मेरा लंड कब तक सह पाता, एक तेज धार के साथ अर्पिता के मुँह, चेहरा, गाल, आँखें सब भर गयी।
इस बार अर्पिता को पहले की तरह उलटी जैसा नहीं हुआ, बल्कि वो ख़ुशी ख़ुशी मेरा माल चाटने लगी, आखिर की बूँद तक नहीं छोड़ी।

और फिर मेरे ऊपर आकर किस करने लगी पर उसके मुँह में अभी भी मेरा वीर्य था, आज पहली बार मैंने अपना ही वीर्य चखा।
हालांकि मुझे कोई इच्छा नहीं थी इस चीज़ की।

इसी के साथ चूंकि हम दोनों झड़ चुके थे तो एक बार माहौल फिर से शांत हो गया।

अभी तक चूत और लंड का मिलन नहीं हुआ था, न ही अभी तक अर्पिता की चूत के दर्शन हुए, न ही उसके मम्मों के।
मेरा मन तो था कि अर्पिता को स्विमिंग पूल में चोदूँ क्योंकि मैंने भी अभी तक सेक्स की हर विधा का पूरा मजा नहीं लिया था और आज तक किसी लड़की को पूल में नहीं चोदा था, पर चूंकि अर्पिता अक्षत यौवना थी और उसके लिए आसन नहीं होगा पूल में दर्द सहन करना।

दो घंटे के फ़ॉरप्ले करने के बाद हम थक गए थे, ऊपर से पहले ड्राइव करके भी आये थे, भूख भी लगी थी तो हमने सोचा कुछ खा लें!

मैंने अपने नौकर को फ़ोन करके कुछ खाने को और कुछ पीने को मंगवा लिया।

कुछ देर में खाना भी आ गया!
बाकी की कहानी अगले भाग में… कि कैसे मैंने अर्पिता की सील तोड़ी!

कैसी लगी मेरी कहानी आप मुझे मेल कर सकते हैं!
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