चन्दा भाभी का दूध

पवन वर्मा 2013-07-03 Comments

पवन वर्मा

मैं लखनऊ का रहने वाला हूँ, मेरी उम्र 25 साल है, घर पर सब मुझे रोहित कह कर बुलाते हैं।

मैं बचपन से ही चोदू किस्म का इन्सान हूँ, गर्म लड़कियाँ और औरतें मेरी कमजोरी हैं। मेरा लण्ड 7 इँच लम्बा और 3 इंच मोटा है, जिसकी प्यास बुझती ही नहीं !

यह मेरी पहली कहानी है, जिसे मैं आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूँ, मेरा पहला अनुभव आपके सामने हाजिर है, सभी अन्तर्वासना पाठकों, जिनमें लड़कियाँ और औरतें भी शामिल हैं, से अनुरोध है कि वे मेरी इस प्रस्तुति के बारे में मुझे मेल जरूर करें !

बात उस समय की है जब मैं नया नया लखनऊ आया था, मैं मूलत: हरदोई का रहने वाला हूँ, जब मैं लखनऊ आया तो मैंने कटरा, हुसैनगँज में कमरा लिया।

जिस घर में मैं रहता था उसी घर में एक और परिवार रहता था, जिसमें पति पत्नी और उनके 2 बच्चे थे, पति बैंक में चपरासी थे और एक लड़का जो लगभग 2 साल का और लड़की 8 महीने की थी।

उन बच्चों की मम्मी जिनका नाम चन्दा था, मैं उन्हें भाभी कहता था, भाभी की उम्र लगभग 28 साल होगी और उनके पति की उम्र लगभग 36 साल होगी।

वो मुझसे किसी ना किसी बहाने बाते करने की कोशिश किया करती थी।

उन्हें देख कर ऐसा लगता था कि वो जवानी की आग में जल रही हैं और वो आग उनके पतिदेव बुझा नहीं पा रहे हैं, पर एक पतिव्रता नारी होने के कारण वो किसी और से अपने इस दर्द को कह नहीं पा रही हों, पर मैं उनके इस दर्द को महसूस कर रहा था।

मैं अकेला रहता था तो शाम के समय वो मुझे चाय देने आया करती थी और इस तरह से मैं किसी ना किसी बहाने उनके कमरे में भी जाया करता था।

धीरे धीरे उनसे मेरी अच्छी दोस्ती हो गई। मैं भाभी से वो सारी बातें कर लिया करता था जो एक पति पत्नी के बीच होती हैं।

उनके पति बैंक से शाम को देर से आते थे, मेरे पास दिन में पूरा समय होता था भाभी से अकेले में बातें करने का और उनकी तारीफ़ करने का।

वो बहुत सेक्सी लगती थी, वो हमेशा साड़ी पहना करती थी और चोली कट ब्लाउज में क्या लगती थी !

एक दिन भाभी ने लाल रँग की साड़ी और काले रँग का ब्लाउज पहना और मुझे आवाज लगाई।

उनकी आवाज सुन कर मैं तुरन्त उनके पास पहुँच गया।

भाभी बोली- रोहित, मेरा पँखा खराब हो गया है जरा इसे देख लो।

मैंने उनसे स्टूल माँगा और उसे पकड़ने को कहा।

उनकी साड़ी का पल्लू नीचे लटक रहा था और उनकी चूचियाँ उभरी हुई साफ़ दिखाई दे रही थी। मैं उन्हें घूरे जा रहा था पर वो उसे अनदेखा कर रही थी और मुझे देख कर मुस्करा रही थी।

उस दिन मैं पंखा ठीक करके चला आया।

फिर दूसरे दिन दोपहर में मैं टी वी देखने के बहाने उनके कमरे के पास जाकर दरवाजा खोला तो वो अपनी बच्ची को अपनी चूची से दूध पिला रही थी।

श्रुति उनकी बच्ची का नाम था, मैंने मजाक में कहा- भाभी, श्रुति को दूध पिला रही हो?

तो वो हंसते हुए अनजाने में बोल गई- तुम्हें भी पीना है क्या?

मैंने कहा- मेरे भाग्य में यह कहाँ है?

वो बोली- रुको, अभी तुमको मैं भाग्यशाली बनाती हूँ।

थोड़ी देर में श्रुति दूध पीते पीते सो गई, भाभी ने उसे पलंग पे लेटा दिया।

और सोफ़े में मेरे पास उसी हालत में आकर बैठ गई, मुझे तो विश्वास ही नहीं हो रहा था कि आज मुझे उनकी गोल गोल दूध से भरी चूचियाँ पीने को मिलेंगी।

फिर उन्होंने मेरा सिर अपने हाथों से पकड़ कर अपनी चूचियों की ओर झुकाया और उन्हें चूसने को कहा। मैं भी उनकी चूचियाँ मुँह में भर कर पीने लगा, अभी भी मीठा मीठा दूध निकल रहा था।

काफ़ी देर तक मैंने उनकी चूचियाँ पी, फिर उन्होंने मुझसे खड़े होने को कहा, मैं खड़ा हो गया। उन्होंने मेरे सारे कपड़े उतार दिये और मुझे पूरा नंगा कर दिया और अपने हाथ से मेरे लण्ड को सहलाने लगी और अचानक उसे मुँह में लेकर चूसने लगी।

काफ़ी देर तक वो मेरे लण्ड को चूसती रही, मुझे बहुत मजा आ रहा था।

तभी वो थोड़ा रुकी और अपने भी सारे कपड़े उतार दिये पर अपनी ब्रा और पैन्टी नहीं उतारी, बोली- रोहित, जानू सब कुछ मैं ही उतार दूँगी तो तू क्या करेगा।

वो काले रंग की ब्रा और पैन्टी पहने हुये थी, क्या सेक्सी माल लग रही थी।

चंदा भाभी ने अपने होठों को मेरे होठों में रख दिया और चूसने लगी। वो जिस तरह से मेरे होठों को चूस रही थी, लग रहा था कि जन्मों की प्यासी थी वो।

फिर मैंने उन्हे नँगी किया उनकी ब्रा और पैन्टी को उतार दिया और उनकी चूचियोँ को हाथो से सहलाने लगा और थोड़ी देर बाद हम 69 अवस्था में लेट गये।

मैं उनकी चूत चाटने लगा और वो मेरे लण्ड को जोर जोर से चूस रही थी, हम दोनों इस तरीके से काफ़ी देर तक करते रहे।

भाभी बोली- जानते हो रोहित, मेरी शादी को सात साल हो गये पर मुझे तेरे भैया के लण्ड में इतना कड़कपन नहीं दिखा, तेरा तो बहुत सख्त है और मोटा भी, मेरे पति से मुझे बच्चे मिले पर सन्तुष्टि नहीं, पर लगता है कि आज मेरी प्यास बुझ जायेगी !

15 से 20 मिनट तक लगातार चूसने के बाद मैं भाभी के मुँह में ही झड़ गया, मेरे वीर्य को भाभी ने पूरा पी लिया और उनकी भी चूत से पानी निकल रहा था जिसे मैंने पिया।

और फिर मैंने उन्हें सीधा किया और अपने लण्ड को उनकी चूत पर रखा और धीरे से अन्दर की ओर धकेला। मेरा लण्ड लगभग 4 इँच चूत में घुस चुका था, उनके मुखसे उफ़्फ़ और सीसी की आवाजें निकल रही थी।

मेरा भी जोश परवान चढ़ रहा था, मैंने भी मौके की नजाकत को समझा, एक जोर का धक्का लगाया और 7 इंच के लण्ड को पूरा पूरा अन्दर घुसेड़ दिया।

भाभी ने भी मेरा साथ दिया और जोर जोर से अपने चूतड़ हिलाने लगी और तेज तेज चोदने को कहने लगी।

मैं भी तेजी से धक्के लगाने लगा।

चन्दा भाभी बोली- ओह ! आह ! नहीं ! मैं तो मेरे पति से चुदवाती हूँ पर उनका इतना बड़ा और मोटा नहीं है।

अब उसे भी मजा आने लगा था तो मैंने अपने गति बढ़ा दी। यह कहानी आप अन्तर्वासना.कॉम पर पढ़ रहे हैं।

फ़िर से चन्दा भाभी आहें भरने लगी और सिसकारियाँ तेज़ होने लगी, वो बोल रही थी- ओ रोहित कमीने… ऊऊह्ह्ह… आअ… ह्ह्ह… अहहहः… स्स्स्स्स… मादरचोद… चोद दे मुझे !

और गालियाँ सुनते ही मैं पूरे जोश में आ गया और जोर जोर से चोदने लगा। अब मैं भी चालू हो गया, मैं बोला- ले मेरी रण्डी… ले मेरा लवड़ा खा जा… ले और जोर से ले… ले तेरी माँ की चूत…

और मैंने अपनी स्पीड और बढ़ा दी, पूरे कमरे में सिर्फ गालियों की और फक फक फक और फच फच की आवाजें आ रही थी।

चन्दा भाभी ने अपने दोनों टांगों से मुझे कस कर पकड़ रखा था और भाभी पूरे जोश में थी, बोल रही थी- बहिनचोद और जोर से चोद मुझे… फाड़ दे मेरी चूत को… आआअ… स्स्स अहः… अहहः… ओह होह….. ले… ले माँ के लवडे… भोसड़ा बना दे मेरी चूत को… आज से चन्दा की चूत तुम्हारी है… जब चाहे इसे चोदना तू !

अब भाभी चरमसीमा पर थी, वो अपने चूतड़ जोर जोर से हिला रही थी, चन्दा भाभी बोली- रोहित, पूरी ताकत से चोद मुझे ! मैं आने वाली हूँ !

मैं भी पूरी तेजी से उसे चोदे जा रहा था। भाभी का शरीर अब अकड़ने लगा था, उसने मुझे कस कर पकड़ा और ह्ह्ह्हह…. अहहः …….ह्ह्ह…. अह्हह…. स्सस्सस करते हुए वो झड़ गई।

पर मैं अब तक नहीं झड़ा था, अब मैं कहाँ रुकने वाला था, मैं शॉट पे शॉट मारता गया और लगभग दस मिनट के बाद मैं झड़ने वाला था तो चन्दा भाभी से कहा- मैं आ रहा हूँ, मैं अपना लण्ड बाहर निकाल लूँ?

तो भाभी बोली- नहीं पूरा माल अंदर ही डाल दे ! फ़िर क्या था, मैंने ऐसे जोर के धक्के लगाये कि भाभी भी चरमरा उठी और उसकी चूत मैंने अपने वीर्य से भर दी। फ़िर थोड़ी देर तक मैं उस पर ही लेटा रहा।

बाद में मैंने पूछा- भाभी, आपने मेरा माल अन्दर डलवा लिया? कुछ हो गया तो?

तो भाभी ने बताया- मैं माला डी लेती हूँ।

कहानी कैसी लगी, जरूर बताना।

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