मौसी की बेटी की चूत चुदाई की वो हसीन रात

(Mausi Ki Beti Ki Chut Chudai Ki Wo Haseen Raat)

नमस्कार दोस्तो, मेरा नाम माहिर सिंह है, मैं उत्तर प्रदेश के वाराणसी शहर से कुछ दूर एक गांव में रहता हूं। मेरी उम्र 22 साल है, और लम्बाई 5.2 फुट है। मेरी लम्बाई औसत से भी कुछ कम होते हुए भी मैं दिखने में ठीक हूँ। इसकी एक वजह ये है कि मैं ज्यादा मोटा या पतला नहीं हूँ।
मैं ये नहीं कहूंगा कि मेरा लन्ड बहुत बड़ा है मेरे लन्ड का लम्बाई 5.5″ इंच और मोटाई 3 इंच है जो किसी भी औरत को संतुष्ट कर सकता है।

अन्तर्वासना पर यह मेरी पहली कहानी है अगर कुछ गलती होती है तो उसके लिए मैं पहले ही सबसे माफी मांगता हूं।

अब आपको ज्यादा बोर न करते हुए मैं अपनी सेक्स कहानी पर आता हूँ जो आज से 5 महीने पहले मेरी और मेरे मौसेरी बहन के बीच घटित हुई।

मेरी मौसी की बेटी का नाम अर्चना (बदला हुआ नाम) है, उम्र 23 साल। उसकी लम्बाई मुझसे भी कम लगभग 5 फुट होगी लेकिन दिखने में कयामत है जिसकी वजह उसका शानदार फिगर है 32-30-32, जब वो टाइट जीन्स और टीशर्ट पहन कर अपनी सेक्सी गांड हिलाते हुए चलती है तो उसे देख कर अच्छे अच्छे लोगों का लन्ड सलामी देने लगे। आस पास के कई लड़के उसके ऊपर लाइन मारते थे, लेकिन वो किसी को भाव नहीं देती थी।

मैं अक्सर मौसी के घर आया जाया करता था और रात को वहीं रुक जाता था। मौसी का परिवार काफी बड़ा था क्योंकि उसके देवर देवरानी और उनके बच्चे भी साथ में ही रहते थे.

मेरी मौसेरी बहन के दो भाई हैं एक उससे छोटा और दूसरा उससे बड़ा… मैं अक्सर उन्हीं दोनों के साथ खेलता था।
जब मैं 12वीं में था, तब से मैं अपनी बहन के ऊपर लट्टू था और हमेशा उसे निहारता आ रहा हूँ, मैंने कई बार उसे सोते हुए किस किया है और ना जाने कितनी बार उनके नाम की मुठ मारी है।
उसके बाद वो पढ़ने के लिए हॉस्टल में चली गयी थी.

एक बार मैं मौसी के घर गया हुआ था और वो भी छुट्टियां मनाने घर आयी हुई थी। एक बात आप लोगों को बता दूँ कि अर्चना दीदी बहुत सीधी सादी लड़की है और इसी वजह से उसका किसी के साथ कोई चक्कर नहीं है।

उस दिन हमने बहुत बातें की और मस्ती की. हमारे साथ उसका बड़ा भाई मनीष भी था। रात को हम सबने मिलकर साथ में खाना खाया और फिर सोने के लिए चले गए। वैसे तो अर्चना एक अलग कमरे में सोती है लेकिन उस दिन किस्मत से हम लोगों के साथ ही सोने के लिए आ गयी।

हम में से नींद तो किसी को आ रही नहीं थी तो भैया ने कम्प्यूटर पे एक मूवी लगा दी। कुछ देर मूवी देखने के बाद सबको नींद आने लगी और सब सो गए, बिस्तर पे सबसे पहले अर्चना, फिर मैं और आखिर में भैया सोये हुए थे।

सोते हुए रात में अचानक मेरी नींद खुल गयी और मुझे सुसु भी लगी थी तो मैं बाथरूम में पेशाब करने चला गया और जब वापस आया तो अर्चना को सोता देखकर में उसे फिर से निहारने लगा. उसकी चूचियाँ ऐसी लग रही थी जैसे दो पर्वत खड़े होकर खुद पे इतरा रहे हों! जब वो सांस लेती तो उसके वो पर्वत ऊपर नीचे हो रहे थे जिन्हें देखकर मेरा शैतानी दिमाग खुद ब खुद काम पे लग गया।

अपनी बहन के पास जाकर मैं उसे हल्की रोशनी में फिर से उसे ऊपर से लेकर नीचे तक निहारने लगा. वो ऊपर की तरफ मुँह करके सोई हुई थी जिसकी वजह से मुझे उसकी चूचियों के उभार साफ नजर आ रहे थे।
मैं उसकी बगल में लेट गया और अपने हथेलियों को उसकी बग़ल में इस तरह रखा कि अगर वो मेरी तरफ मुड़े तो उसकी वो मुलायम और कोमल चूचियाँ मेरी हथेलियों में आ जायें।

मैं इन्तजार करने लगा कि कब मेरी बहन मेरी तरफ करवट ले… कुछ ही देर में वही हुआ जिसका मैं इंतजार कर रहा था, उसने मेरी तरफ करवट ली तो अर्चना की वो मुलायम चूचियाँ मेरे हाथों में आ गई जिन्हें मैं ना जाने कब से छूने के सपने देखता आ रहा था।

अब मेरी दिल की धड़कन काफी तेज हो गयी थी और मुझे काफी डर भी लग रहा था कि कहीं वो जग न जाये। मैंने डरते हुए उनकी चूचियों को हल्का सा ज़ोर देकर आहिस्ता से अपने हाथों में भींचा.
आह… हा हा… क्या मस्त अहसास था!

ऐसा लग रहा था जैसे कोई रस से भरा गुब्बारा हाथ में आ गया हो!
और हो भी क्यों ना… अर्चना की चूचियाँ आखिर थी भी तो काफी बड़ी ना!

फिर मैंने हल्के से चूचियों के ऊपर के निप्पल को अपने दो उंगलियों के बीच ले लिया. डर से तो गांड फ़टी जा रही थी लेकिन इस आनन्द के सामने मुझे इस डर में भी मज़ा आ रहा था।

कुछ देर ऐसे ही सहलाने के बाद अर्चना के निप्पल कड़े होकर तन गए और अर्चना ने भी थोड़ी हरकत की. इस वजह से मेरी तो फट के हाथ में आ गयी कि कहीं मेरी बहन जाग तो नहीं गयी?
फिर वी मेरी तरफ पूरी तरह से मुड़ गयी, मैं वैसे ही डर के मारे पड़ा रहा और यह देखने लगा कि कहीं वो जागी हुई तो नहीं है.

कुछ देर के बाद जब मुझे यह यकीन हो गया कि वो नींद में ही है, तब जाकर कहीं मेरी जान में जान आयी। अब हुआ यह कि उसके पूरी तरह से करवट लेने की वजह से मेरा हाथ उसकी चूचियों के नीचे दब गया था,

मैंने बड़ी मुश्किल के बाद वहां से अपना हाथ निकाला।

थोड़ी देर शांत रहने के बाद मैंने हल्के से अपना हाथ फिर से उसकी दूसरी चूची के ऊपर रखा और हल्के हल्के सहलाने लगा। कुछ देर सहलाने के बाद मैंने धीरे-धीरे अपने हाथों का दबाव अर्चना की चूचियों के ऊपर बढ़ाया और दबाने लगा.

तभी अचानक मेरी बहन का हाथ मेरे हाथ के ऊपर आया, मेरी तो फिर से गांड फट गयी… डर के मारे मेरी जान निकली जा रही थी. अब तो मैं गया!
कुछ समझ नहीं आ रहा था कि क्या करूँ!

तभी अर्चना उठकर बैठ गयी और मुझसे बोली- ये क्या कर रहा है?
मैं चुप रहा, डर के मारे तो जैसे मेरी जबान ही कट गयी हो!
अर्चना ने दुबारा पूछा तो मैं डरते हुए उससे माफी मांगने लगा और गिड़गिड़ाते हुआ उससे बोला- माफ कर दो दीदी… गलती हो गयी! मैं अब से कभी सपने में भी ऐसा नहीं करूँगा! करना तो दूर, सोचूंगा तक नहीं! बस एक बार माफ कर दो!

इस पर वो बोली- चुप हो जा… भैया जाग जाएंगे! और तू डर मत, मैं किसी से नहीं बोलूंगी लेकिन एक शर्त पर!
मैंने पूछा- कैसी शर्त?
तो अर्चना ने पूछा- तेरी कोई गर्लफ्रेंड है या नहीं?
मैंने ना में सिर हिलाया तो अर्चना बोली- तभी ये सब कर रहा है!
तो मैं भी थोड़ा खुलते हुए बोला- दीदी, क्या करूँ, कोई होती तो ये नौबत न आती!

इस पर मेरी बहन मुस्कुराई और बोली- अच्छा बेटा, तो क्या नौबत आती? हाँ?
इस पर मैं हंसते हुए बोला- तब तो गर्लफ्रेंड के साथ ही सारी नौबत आती और सब उसके साथ ही होता।

फिर अर्चना ने पूछा- कभी कुछ किया है?
मैंने ना में सिर हिलाया तो उसने हंसते हुए कहा- मेरी तरह ही कुंवारा निकला तू तो… अच्छा तो अब मेरे साथ करेगा?
इस पर मैंने अनजान बनते हुए पूछा- क्या?
तो वो बोली- वही जो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ करता!

मेरी तो खुशी का ठिकाना ही नहीं रहा, मैंने जल्दी से हाँ में सिर हिलाया और उसे पकड़ कर चूमने चाटने लगा.
तो दीदी मुझे दूर करके बोली- इतनी हड़बड़ाहट किस बात की है? मैं भागी नहीं जा रही! और ऐसे ही करेगा सब ऊपर से? कपड़े तो निकाल ले।

लेकिन तभी हमें ख्याल आया कि हमारा बड़ा भाई हमारे साथ सोया हुआ है तो मैंने अर्चना को उसके कमरे में चलने को कहा. हम दोनों दूसरे कमरे में चले गए और मैंने तुरंत अपने कपड़े उतार दिए और अर्चना ने अपने!
फिर मैं अपनी बहन के नंगे बदन के ऊपर चढ़ गया और पागलों की तरह उन्हें किस करने लगा और उसकी एक चूची को बायें और दूसरी चूची को दायें हाथ में जकड़ कर जोर जोर से दबाने लगा जिससे अर्चना को दर्द हो रहा था।
वो बोली- आराम से कर… दर्द होता है! यहीं हूँ मैं!

कुछ देर ऐसे चूमने और दबाने के बाद मैं अपनी बहन की चूची को चूसने लगा और एक हाथ से दूसरी चूची दबा रहा था। कुछ देर बारी बारी से दोनों चूचियों को चूसने के बाद में उसके पैरों के बीच आ गया.

वैसे तो मुझे चुदाई का कोई अनुभव नहीं था, ना ही उसको… लेकिन मुझे सब पता है क्योंकि मैं लगभग हर दिन अन्तर्वासना की कहानियां पढ़ता हूँ और सेक्स की वीडियो देखता हूं।
फिर मैंने अपनी बहन की पैंटी पकड़ कर नीचे सरकाई और निकाल कर उसकी चूत को सूंघने लगा.
वाह… क्या खुशबू थी… मेरी बहन की चूत की खुशबू ने मुझे और पागल बना दिया, मैंने उसकी चूत को चाटना चूमना शुरू किया और उसके मुँह से ‘आह… उम्म… आह… की आवाज़ की सिसकारियां निकलने लगी.

धीरे धीरे मेरी बहन भी मेरी तरह काफी गर्म होने लगी और काफी तेज सिसकारियां लेने लगी और मेरे सिर को पकड़ के अपने चूत पे दबाने लगी. कुछ देर बाद उसकी चूत के सब्र का बांध टूट गया और उसकी चूत से उस बांध का पानी बहने लगा.
मैंने बहन की चूत चाट चाटकर साफ की.

उसके बाद मैंने उसको बोला मेरा लन्ड चूसने को!
लेकिन वो मना करने लगी. काफी देर मनाने के बाद भी जब वो नहीं मानी तो मैं उसे समझाने लगा, कुछ देर समझाने के बाद वो मान गयी और आधे मन से उसे मुँह में लेकर चूसने लगी.

कुछ ही देर चूसने के बाद उसने मेरे लन्ड को बाहर निकाल दिया और बोली- मुझसे न होगा!
तो मैंने भी जोर नहीं दिया।

अब बारी मेरी बहन की चूत चुदाई की थी तो कुछ देर उसे चूमने और फिर से गर्म करने के बाद मैंने थोड़ा सा थूक अपने लन्ड और उसकी चूत पे लगाया और लन्ड का सुपारा पकड़ कर उसकी चूत पे रगड़ने लगा.

मेरी बहन कामवासना से पागल सी हो गयी और कमर ऊपर उठाकर मेरे लन्ड को अपनी चूत में लेने की नाकाम कोशिश करने लगी.
कुछ ही देर में वो गिड़गिड़ाते हुए मुझसे बोली- अब इंतज़ार नहीं होता भाई… डाल दे अपना लन्ड मेरी चूत में!

उसे कुछ देर ऐसे ही उसे तड़पाने के बाद मैंने अपने लन्ड का सुपारा बहन की चूत के मुंह पे फंसाया. मुझे पता था कि हम दोनों का पहली बार है तो इसलिए मैं उसके मुंह को अपने मुंह में लेकर चूमने लगा और अचानक ऐसे ही उसे चूमते हुए एक जोर का धक्का लगाया, मेरा लन्ड उसकी चूत को चीरता हुआ अंदर चला गया.

मैंने अपनी कमर को पीछे खींचकर फिर से एक जोरदार धक्का लगाया, इस बार मेरा लन्ड उसकी चूत की सील तोड़ते हुए उसकी चुत में और अंदर घुस गया और उसकी एक बहुत जोर की चीख मेरे मुंह में ही रह गयी, उसकी आंखों में आंसू आ गए थे।

मैं रुक गया, मेरे भी लन्ड पर भी जलन हो रही थी लेकिन उस वक़्त चुदाई के आगे मुझे कुछ भी नहीं दिख रहा था, मैं उसकी चूचियों को पकड़ कर फिर से दबाने व चूसने लगा. जब उसका दर्द कम हुआ तो मैं अपने लन्ड को फिर से आगे पीछे करने लगा और बहन की चुदाई शुरू की.

धीरे धीरे मेरा लन्ड उसकी चूत में रास्ता बनाते हुए पूरा अंदर तक चला गया और अपनी जगह बना ली। अर्चना के चेहरे पर दर्द और खुशी का मिलाजुला एहसास दिख रहा था क्योंकि अब उसे भी मज़ा आना शुरू हो गया था, अब तो वो भी पूरे मज़े ले कर चूत ऊपर उठा उठा के चुदाई का मज़ा ले रही थी और मैं उसकी चूचियों को पकड़ कर उसकी चुदाई किये जा रहा था।
उसके मुंह से आह… उम्म्ह… अहह… हय… याह… फक… आह… फक की सिसकारियों के साथ ‘और जोर से… फाड़ दे मेरी चूत को… और ज़ोर से डाल… फाड़ डाल मेरी इस चुत को… बहुत परेशान किया है इसने मुझे…’ बोले जा रही थी.

मैं भी अपनी बहन की बातें सुनकर और जोश में चुदाई कर रहा था.

करीब 15 मिनट की ताबड़तोड़ और जबरदस्त चुदाई के बाद अर्चना का शरीर अकड़ने लगा और वो अपने चरम पे पहुँच कर झड़ने लगी और उसके कुछ ही देर धक्के लगाने के बाद मैं भी झड़ने वाला था तो मैंने अपना लन्ड बाहर निकाल लिया और सारा माल अर्चना के पेट के ऊपर गिरा दिया।

कुछ देर बाद वो उठी फर अपना पेट और चूत एक कपड़े से साफ किया और बाथरूम की तरफ चल दी. वो ठीक से चल भी नहीं पा रही थी तो मैं उसे सहारा देकर ले गया, फिर हम भी बहन ने एक दूसरे को साफ किया और वापस आ गए।

वापस आने के बाद हम भाई बहन बाक़ी पूरी रात एक दूसरे को चूमते चाटते रहे. मेरी बहन मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर सहलाती रही, मैं अपनी बहन की चूत में उंगली से सहलाता रहा. चूत में उंगली डालने से उसे दर्द भी हो रहा था. उस पूरी रात मैंने अपनी बहन की चूचियां और होंठ चूसता रहा. चुदाई के बाद ये सब करके हम भाई बहन काफी थक गए थे इसलिए हम अपने अपने कपड़े पहन कर एक दूसरे को किस करके सोने लगे तो मेरी बहन ने कहा- भाई, तू जाकर बड़े भाई के पास ही सो जा!

मुझे भी यह बात ठीक लगी और मैं उठ कर अर्चना के बड़े भाई के पास आकर सो गया.

अगली रात हमने 3 बार अलग अलग पोज में मस्त चुदाई की. उस रात भी हम अलग कमरे में चले गए थे. दूसरी रात मैं अर्चना की चूत का भुर्ता बनाता रहा.

उसके बाद कई बार जब भी हमें मौका मिलता, हम चुदाई कर लेते हैं, वो रात मेरी जिंदगी की सबसे हसीन और सबसे खूबसूरत रात थी, मैं उस रात को में कभी भी नहीं भूल सकता।

मेरी बहन की चूत चुदाई की कहानी कैसी लगी आपको? जरूर बताएं मुझे… आपके मेल्स का इंतजार रहेगा! आशा करता हूँ कि आप मुझे और कहानियां लिखने के लिए प्रेरित करेंगे.
मैं अपना निजी ईमेल नहीं दे सकता था तो आपसे सम्पर्क के लिए एक नई ईमेल बनाई जो ये है.
अपने ख्याल और सुझाव जरूर बताइएगा।
धन्यवाद.
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