होली खेल कर भाभी पटाई फ़िर खेत में भाभी की चूत की चुदाई की

(Holi Khel Kar Bhabhi Patai Fir Khet Me Bhabhi Ki Choot Ki Chudai Ki)

प्रेम यादव 2017-05-01 Comments

मैं प्रेम यादव अलवर राजस्थान से… आप सभी दोस्तों और भाभियों को मेरा नमस्कार!
मैं पहली बार कहानी लिख रहा हूँ, अगर कोई ग़लती हो जाए तो माफ़ करना!

मेरा खुद का बिजनेस है। मेरी हाइट 5’9″ है, मेरे लंड का नाप 6″ है, दिखने में मैं हैंडसम हूँ ऐसा मेरे दोस्त कहते हैं… वैसे हूँ भी! वैसे मैं हूँ पतला, पर दम है, ऐसा भाभी कहती है।

अब आते हैं कहानी पर… यह कहानी मेरी और मेरी विधवा भाभी की है। भाभी का नाम अनिता है, एकदम मस्त माल सबका लंड खड़ा कर देने वाला फिगर है 32-28-34 का, रंग दूध की तरह सफेद!

मेरी स्कूल टाइम से ही कई गर्लफ्रेंड रही पर मैंने कभी किसी के साथ ग़लत नहीं किया, मेरे से बहुत भाभी भी सेक्स करने को तैयार हैं, कुछ एक की वासना शांत भी की पर अनिता में जो बात है वो औरो में नहीं!

बात अभी कुछ दिन की है, मैं सुबह छत पर कबूतरों को दाना डालने गया तो मेरी नज़र भाभी पर गई, वो सलवार का नाड़ा खोल रही थी और फिर पेशाब करने बैठ गई। मैं छुप कर काफ़ी देर तक देखता रहा, मैंने दाना डाला और नीचे आ गया।

एक दो बार फिर ऐसा हुआ पर मैंने खास ध्यान नहीं दिया।

फिर होली का दिन था, मैं उनके घर होली खेलने चला गया, सभी बच्चे होली खेल रहे थे। मैंने सभी को गुलाल लगाया… भाभी को भी!
थोड़ी देर बाद भाभी ने बाल्टी पानी से भर के मेरे ऊपर डाल दी, मुझे भी अब बदला लेना था तो मैंने भी बाल्टी में पक्का रंग मिलाया और भाभी पर डाल दिया।
भीगने से भाभी के कपड़े बदन से चिपक गये, जिससे उनके मोटे मोटे कूल्हे और चुची गजब ढा रहे थे, देख कर मेरा लंड फुंफकार मारने लगा।

मैंने भाभी को पकड़ लिया और उनके गीले बदन पर गुलाल मलने लगा.. मैंने उनके कमीज़ में हाथ डाल कर उनकी चुची पर खूब रंग लगाया, मेरे पकड़ने से मेरा लंड उनके कूल्हो के बीच में चुभने लगा जिससे वो भी मस्ती में मस्त हो गई, उन्होंने अंजान बनते हुए मेरे लंड को छू लिया और उसे भींच दिया.. उम्म्ह… अहह… हय… याह…
उन्होंने ये सब ऐसे किया जैसे सब ग़लती से हो गया हो।

उसके बाद मैंने भाभी को उठा कर कीचड़ में डालने लगा.. तो इस धक्कम पेल में मेरा हाथ उनकी चूत को काफ़ी बार टच कर गया।
वो और मस्ती में आ गई.. अब मुझे ग्रीन सिग्नल दिखाई दे रहा था।

फिर कुछ दिन मैं भाभी की घर नहीं गया।
उसके बाद मैं जब भी उनके घर जाता वो मुझे छेड़ने लगी.. अब फिर होली खेलते है, मैं हंस के टाल देता..

फिर एक दिन मैंने मज़ाक में कह दिया कि तो पिचकारी से खेलते हैं सफेद रंग लगा कर!
इस पर वो मुझे नशीली नज़रों से देख कर मुस्कराने लगी।

इतना था कि मैंने उन्हें पकड़ लिया.. वो कहने लगी- अभी नहीं, कोई देख लेगा।
मैंने उनसे मिलने के लिए बोला, वो मान गई।

फिर एक दिन उन्होंने मुझे रात के 11 बजे मिस कॉल दी… मैंने कॉल किया तो उन्होंने बाहर आने के लिए बोला। मैं तुरंत चला गया। भाभी जी बाहर इंतजार कर रही थी, वो मुझे सरसों के खेत में लेकर गई जहाँ से कुछ सरसों काट रखी थी।

वहाँ पर उन्होंने एक दरी बिछाई जो पहले से ही वहाँ रखी थी।

मैंने आव देखा ना ताव… भाभीजी को पकड़ के पागलों की तरह चूमने लगा… कभी होंट तो कभी उनकी छाती… कपड़ों के ऊपर से ही उनकी चुची को हल्का सा काट लेता.. इससे वो सीत्कार उठती थी!
मुझे बहुत मजा आ रहा था।

इतने में भाभी ने मेरी कैपरी निकाल दी… और टी-शर्ट निकालने को कहा।
मैंने भी एक समझदार बच्चे की तरह बात मानी और सारे कपड़े निकाल दिए।

अब मैंने भाभी जी से बोला- आप भी सूट निकालो!
तो वो बोली- तुम खुद ही निकाल लो!
तो मैंने शर्ट तो गले वाले हिस्से से पकड़ कर खींच दिया जिससे वो फट गया… मुझे यह देख कर और जोश आ गया तो मैंने भाभी की ब्रा और सलवार भी फाड़ दी।

अब भाभी जी केवल पेंटी में थी क्या गजब लग रही थी वो… चाँद की चाँदनी में उनका संगमरमर का सा बदन चमक रहा था।
मैंने टाइम बेकार ना करते हुए भाभी की पेंटी भी फाड़ दी, और उनकी चुची मुँह में भर कर चूसने लगा।
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क्या मजा आ रहा था दोनों को… मैं ब्यान नहीं कर सकता।
अब भाभी जी बोली- प्रेम जल्दी से मेरी चूत में अपना लंड डाल दो… और सहन नहीं होता, साली की आग शांत कर दो…
मैंने भाभी जी की चूत पर हाथ रखा तो वो पानी से गीली हो रही थी। मैंने लंड चूत पर सेट किया और ज़ोर से झटका मारा, लंड तो चूत में घुस गया पर भाभी जी की आँखों से आँसू आ गये।

मैंने पूछा- दर्द हो रहा है?
तो वो बोली- तुम चोदो!
मैं भाभी को पूरा मजा देते हुए धीरे धीरे चोदने लगा, भाभी जी भी पूरा साथ दे रही थी।
करीब 15 मिनट की चुदाई के बाद भाभी जी का शरीर अकड़ने लगा और भाभी की चूत बह निकली।

मैंने भी रफ़्तार बढ़ा दी और तेज तेज चोदने लगा।
करीब 5 मिनट बाद मैं भी भाभी की चूत के अंदर झड़ गया।
भाभी जी मुझे चूमने लगी।

मैंने कपड़े पहने और चलने लगा, अब भाभी जी नंगी ही घर गई… चाँदनी में उनके कूल्हे 61-62 हो रहे थे।
मेरा लंड फिर खड़ा हो गया, मैंने भाभी को फिर पकड़ लिया और अब घोड़ी बना कर 20 मिनट फिर चोद कर जाने दिया।

सुबह भाभी जी फ्रेश नज़र आ रही थी, उन्होंने मुझे थैंक्स कहा और फिर जब भी मेरे मन में होती मैं भाभी की चूत की चुदाई कर लेता।
इसके बाद मैंने 2 और भाभी को शारीरिक सुख दिया।

मुझे अपने विचार ज़रूर बताना की आपको मेरी असली सेक्स कहानी कैसी लगी।
आपका अपना प्रेम
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