अब्बू के दोस्त और मेरी अम्मी की बेवफाई -4

(Abbu Ke Dost Aur Meri Ammi Ki Bewafai- Part 4)

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अब तक आपने पढ़ा..

अम्मी धीरे-धीरे राजी हो गई थीं। असलम अंकल अम्मी को अपनी गोद में लिए हुए थे और उनके कुरते में हाथ डाल कर उनके चूचों को मसल रहे थे, बात करके समझा रहे थे जिससे उनका विरोध अब कम हो गया था।

रात होने को थी.. मेरा दिल धड़कने लगा था.. मुझे बहुत ही अजीब लग रहा था कि मेरी अम्मी मेरे सामने ही दो-दो मर्दों से चुदेगीं.. कैसे चुदेगीं.. आह्ह्ह चाचा का और उनके दोस्त का कड़क लण्ड भला अन्दर कैसे घुसेगा?
यह सोच कर तो मेरी चूत में भी पानी उतारने लगा था।

रात को अम्मी मेरे कमरे में आईं और मुझे ठीक से सुला दिया और चादर ओढ़ा कर लाईट बन्द करके कमरे बन्द करके चली गईं।

अब आगे..

अकरम अंकल शायद शराब पी रहे थे.. उसका यह रूप भी मेरे सामने आने लगा था। अपना लण्ड मसलते हुए वो धीरे-धीरे शराब पी रहे थे।
‘उसे चादर उढ़ा दी है.. वो गहरी नींद में सो गई है..’
यह सुनते ही असलम अंकल ने अम्मी को अपनी बाँहों में भरते हुए चूम लिया।

मुझे उनके कमरे से अब अकरम अंकल की भी आवाज सुनाई दे रही थी..
मेरा दिल धड़क रहा था कि अम्मी की आज दो मर्दों से चुदाई होगी।
असलम ने अम्मी को अकरम के पास जाने को कहा।

अम्मी धीरे-धीरे शरमाते हुए अंकल की तरफ़ बढ़ रही थीं.. उनके पास आकर वो रुक गईं.. और अपनी बड़ी-बड़ी आंखों से उन्हें निहारने लगीं।

तभी अम्मी मेरे सामने मुँह करके आ गईं.. मैंने देखा कि उन्होंने आज बेहद ही कीमती ड्रेस पहना हुआ था.. छोटी सी ब्लैक रंग की बैकलेस कुर्ती और उसके साथ लाल रंग की जालीदार सलवार.. यह ड्रेस शायद अकरम अंकल अम्मी के लिए लाए थे।

मैं सोचने लगी कि अरे.. वाह अम्मी ऐसी ड्रेस में..
मेरा दिल बल्लियों उछलने लगा था, ये दोनों हरामजादे आज रात को मेरी अम्मी की चुदाई करेंगे।

अम्मी का तराशा हुआ गुदाज गोरा जिस्म.. ट्यूबलाईट की रोशनी में जैसे चांदी की तरह चमक उठा। उनकी ताजी शेव की हुई चूत की फ़ांकें.. सच में किसी धारदार हथियार से कम नहीं थीं। कैसी सुन्दर सी दरार थी.. चिकनी शेव की हुई रसीली चूत।

‘उफ़्फ़्फ़.. शहनाज़.. आप भी ना.. अभी किसी मॉडल से कम नहीं हो।’ अकरम अंकल ने अम्मी के गोरे सफ़ेद जिस्म को चूमते हुए कहा था।
‘हा.. हा.. हा.. अच्छा जी.. असलम भाईजान की मेहरबानी है.. यह जो तुम्हारे सामने हूँ।’
अम्मी उनसे लिपट कर बातें कर रही थीं। कभी तो वो मेरी नजरों के सामने आ जातीं.. और कभी आँखों से ओझल हो जाती थीं।

तभी अकरम अंकल ने अम्मी का हाथ पकड़ कर अपने सामने सामने खींच लिया और कुर्ती के ऊपर से ही उनके सुडौल चूतड़ों को दबाने लगे। अम्मी की लम्बाई चाचा के बराबर ही थी..

उफ़्फ़.. अम्मी ने गजब कर दिया.. उन्होंने अकरम अंकल की जीन्स की ज़िप धीरे से खोल दी।
‘क्यूं आपको.. मेरे सामने शर्म आ रही है क्या? अपने लण्ड को क्यूं छुपा रखा है.. जानेमन?’

तभी मेरी धड़कन तेज हो गईं.. अंकल ने अम्मी की सलवार के नीचे से अम्मी की गाण्ड को दबा दिया। अम्मी ने अपनी टांग कुर्सी पर रख दी.. ओह्ह्ह तो जनाब ने अम्मी की गाण्ड में उंगली ही घुसेड़ दी है।
वो अपनी उंगली गाण्ड में घुमाने लगा.. अम्मी भी अपनी गाण्ड घुमा-घुमा कर आनन्द लेने लगीं।

कमरबंद खींचते ही अम्मी की सलवार उनके शरीर से खिसक कर सरसराती हुई नीचे फ़र्श पर आ गिरी। अम्मी की सफ़ेद दूधिया माँसल टांगें नंगी हो चुकी थीं।
‘शहनाज़.. तुम कितनी सुन्दर हो..’

अम्मी ने मुस्कुराते हुए नजर नीची कर ली.. अंकल ने आगे बढ़ कर अम्मी को प्यार से गले लगा लिया। उनका दुपट्टा अलग करके उनके होंठों पर अपने होंठ लगा दिए थे, अम्मी तो जैसे उनसे चिपट सी गई थीं, दोनों के लब एक-दूसरे से मिल गए।

गहरे चुम्बनों का आदान-प्रदान होने लगा। अब अकरम अंकल अम्मी के नंगे भारी-भारी चूतड़ों को चीर कर उनकी गुदा द्वार में उंगली डाल रहे थे।
‘आउच…’

अम्मी के मुख से एक प्यारी सी ‘आह’ निकल पड़ी। पजामे में से अंकल का लण्ड उभर कर बाहर निकलने हो रहा था। अम्मी ने एक बार नीचे उनके लण्ड को देखा और अपनी चड्डी से ढकी चूत उनके लण्ड से टकरा दी। अब वो अपनी चूत वाला भाग लण्ड पर दबा रही थीं।

अंकल ने अपने दोनों हाथों से अम्मी की चूचियों को सहला कर दबा दिया.. तो अम्मी सिमट सी गईं।
‘शहनाज़.. मेरे लण्ड को भी प्यार करो..न..?’
अंकल ने अम्मी की गर्दन को चूमते हुए कहा।

मुस्कुराते हुए अम्मी धीरे से नीचे बैठ गईं और उनकी जीन्स को नीचे खिसका दिया.. फिर उसे धीरे से नीचे उतार दिया। अंकल का सात इंच का लण्ड बाहर आ गया.. उनका सुपाड़ा पहले से ही खुला हुआ था.. अम्मी ने मुस्करा कर ऊपर देखा और लण्ड को अपने मुख में डाल लिया। अंकल ने मस्ती में अपनी आंखें बन्द कर ली।

अब अकरम अंकल के हाथ अम्मी की ब्रा को खोलने में लगे थे.. अम्मी ने उनका लण्ड चूसना छोड़ कर पहले अपनी ब्रा को उतार दिया..
हाय रे… अम्मी के उरोज तो सच में बहुत सधे हुए थे.. हल्का सा झुकाव लिए.. चिकने और अति सुन्दर..

अम्मी ने फिर से उनका लण्ड अपने मुख में ले लिया और चूसने लगीं। अंकल के हाथ अम्मी के बालों में चल रहे थे.. उनके बाल खुल गए थे।

अब उन्होंने अम्मी को उठा कर खड़ा कर लिया- शहनाज़.. मुझे भी आप अपनी चूत को प्यार करने की इजाजत देंगी?’
अकरम की इस बात पर पहले तो अम्मी शरमा गईं.. फिर वो बिस्तर पर चित्त लेट गईं और उन्होंने अपनी दोनों टांगें ऊपर को खोलते हुए अपनी चूत पसार ली।

‘हाय.. शहनाज़.. इतनी चिकनी.. इतनी प्यारी.. लण्ड लगते ही भीतर फ़िसल जाए.. 34 साल की होकर भी तुम किसी कुंवारी लड़की से कम नहीं हो।’

‘ऐसे मत बोलो.. मेरी जान.. बस इसे चूम लो.. फिर चाहे जो करो.. भले ही उसमें अपना अन्दर उतार दो..’
अकरम- थैंक्स यार असलम.. तेरे दोस्त की बीवी तो मस्त माल है.. मैं तो कहता हूँ कि परमानेंट बदल ले इसे मेरी बीवी से.. तू मेरी बीवी आयशा को जब चाहे.. जहाँ चाहे.. ले जाया कर.. और जैसे चाहे चोदा कर।
‘अरे यार.. तू भी शहनाज़ को जब चाहे ले जा सकता है.. अब शहनाज़ हम दोनों की दोस्त है।’

असलम अंकल ने अकरम की इस बात का हँस कर जवाब दिया था।

‘अच्छा जी थोड़ा कम मस्का लगाओ..’

अम्मी को चुदने की बहुत लग रही थी.. इस पर अंकल ने अपना मुँह अम्मी की चूत पर लगा दिया.. और उनके दाने को उनके होंठों ने मसल दिया।

‘सीईईए..’ करते हुए अम्मी ने आँखें बंद कर लीं और अपनी चूत उछालने लगीं।

मेरी चूत में भी यह देख कर पानी उतर आया.. इधर मैं अपनी चूत को दबाने लगी।

अम्मी तो खुशी के मारे जैसे उछल रही थीं.. पर अंकल चूत से चिपके हुए उसका रस चूसने में लगे थे।

‘अब तड़पाओ मत.. जैसा मैं कहूँ वैसा करो..’
‘शहनाज़.. पीछे घूम कर कुतिया बन जाओ.. पहले तुम्हारी चिकनी गाण्ड मारूंगा..’
‘ओह.. तुम्हें भी गाण्ड मारना अच्छा लगता है.. कोई बात नहीं.. मेरे दोनों तरफ़ छेद हैं.. किसी को भी चोद दो.. पर पहले अपना ये लण्ड मुझे मुँह से चूसने दो ना..’
‘ओह.. जैसी शहनाज़ जी की इच्छा..’

अकरम अंकल ने एक बार फिर बिस्तर पर बैठ गए और अम्मी को मुँह में अपना लण्ड दे दिया। अम्मी के मुँह से बीच-बीच में सिसकारी भी निकल जाती थी। वो अपने कठोर लण्ड को अम्मी के मुँह में मारते रहे और अम्मी ने अपनी चूत घिसवाना चालू कर दिया।

मुँह से लौड़ा चुसवाते हुए जैसे ही अंकल का वीर्य छलका.. अम्मी के मुँह से भी सीत्कार निकल पड़ी। अम्मी अंकल का सारा वीर्य गटक गई थीं.. और अब वे उनके लण्ड को चाट-चाट कर साफ़ करने लगी थीं।

‘इसमें आपको बहुत मजा आता है ना?’

‘हाँ’ कहते हुए उनके लण्ड को अम्मी ने हिलाया.. फिर अम्मी ने अंकल के लौड़े को अपने चिकने बोबे से लगा दिया और उसे अपनी छाती पर घिसने लगी।

अम्मी अब बिस्तर पर बैठ गईं और अपनी चिकनी चूत को उंगली से पहले सहलाने लगीं.. फिर चूत की फांक को मसलने सी लगीं। फिर अम्मी ने अपना दाना उभार कर देखा और उसे मसलने लगीं.. उन्होंने अपनी गीली चूत में अपनी उंगली घुसा ली और ‘आह’ भरते हुए हस्तमैथुन करने लगीं।

अम्मी जल्दी ही झड़ गईं.. वो शायद पहले से ही बहुत उत्तेजित थीं।

अम्मी के झड़ते ही अकरम अंकल अम्मी की चूत का रस चूसने लगे.. अम्मी ने उन्हें सिसकारी लेते हुए अपनी जांघों के बीच दबा लिया।

‘अब देखो.. मैं फ़िर तैयार हूँ.. अब मैं तुम्हारी जम कर गाण्ड चोदूँगा.. मजा आ जाएगा..’

अम्मी ने घोड़ी बन कर अपनी सुडौल गाण्ड पीछे की और उभार दी.. अकरम अंकल को गाण्ड मारने का शौक था, उन्होंने धीरे से लण्ड गाण्ड में डाल दिया और अम्मी मस्त हो गईं..
ये सब देखने में मुझे बहुत आनन्द आ रहा था।

अम्मी की गाण्ड को अंकल ने बहुत देर तक बजाया, अम्मी भी अंकल के स्खलित होने तक गाण्ड चुदाती रहीं।

यदि आप इस कहानी पर कुछ कहना चाहते हैं तो आपका मेरी ईमेल पर स्वागत है, बस एक निवेदन है कि अभद्रता असहनीय होगी।
कहानी जारी है।
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